गर्भावस्था (Pregnancy) के दौरान एक महिला का शरीर कई तरह के बदलावों से गुजरता है। इस दौरान मां के गर्भ में एक नए जीवन का निर्माण तो होता ही है, साथ ही शरीर में एक अस्थायी अंग (Temporary Organ) भी बनता है, जिसे प्लेसेंटा (Placenta) कहते हैं। यह अंग मां और गर्भ में पल रहे शिशु के बीच एक लाइफ-सपोर्ट सिस्टम (Life Support System) की तरह काम करता है।
यदि आप जानना चाहते हैं कि Placenta Meaning in Hindi क्या है, यह कैसे काम करता है, और गर्भावस्था में इसका क्या महत्व है, तो इस लेख को अंत तक जरूर पढ़ें।
Placenta का हिंदी अर्थ “अपरा” या “गर्भनाल” होता है यह एक ऐसा विशेष अंग है, जो केवल गर्भावस्था के दौरान ही महिला के गर्भाशय (Uterus) में विकसित होता है। शिशु के जन्म के ठीक बाद, इस अंग का काम समाप्त हो जाता है और यह भी शरीर से बाहर निकल जाता है। आम बोलचाल में कई लोग इसे “बच्चे की आंव” या “नाल” भी कह देते हैं।
प्लेसेंटा (Placenta) क्या है और यह कैसे बनता है?
प्लेसेंटा एक गोल, चपटी और स्पंजी संरचना होती है, जो गर्भाशय की अंदरूनी दीवार से जुड़ी रहती है।
निर्माण का समय: गर्भधारण (Conception) के लगभग 5 से 6 सप्ताह बाद प्लेसेंटा बनना शुरू हो जाता है।
विकास: गर्भावस्था के 12वें सप्ताह (First Trimester के अंत तक) तक यह पूरी तरह विकसित होकर अपना काम संभाल लेता है।
कनेक्शन: बच्चा सीधे प्लेसेंटा से नहीं जुड़ा होता, बल्कि वह Umbilical Cord (गर्भनाल) के जरिए प्लेसेंटा से जुड़ता है।
गर्भावस्था में प्लेसेंटा के मुख्य कार्य (Functions of Placenta)
प्लेसेंटा को शिशु का “रक्षक और पोषक” कहा जाए तो गलत नहीं होगा। इसके प्रमुख कार्य निम्नलिखित हैं:
ऑक्सीजन की आपूर्ति: गर्भ में शिशु फेफड़ों से सांस नहीं ले सकता। प्लेसेंटा मां के खून से ऑक्सीजन लेकर अम्बिलिकल कॉर्ड के जरिए शिशु तक पहुंचाता है।
पोषण प्रदान करना: मां जो भी भोजन करती है, उससे मिलने वाले आवश्यक पोषक तत्व (जैसे ग्लूकोज, एमीनो एसिड, विटामिन और मिनरल्स) प्लेसेंटा के माध्यम से ही बच्चे तक पहुंचते हैं।
अपशिष्ट पदार्थों को हटाना: शिशु के शरीर में बनने वाले वेस्ट प्रोडक्ट्स और कार्बन डाइऑक्साइड ($CO_2$) को प्लेसेंटा वापस मां के रक्त में भेज देता है, जिसे मां का शरीर फिल्टर करके बाहर निकाल देता है।
हार्मोन का उत्पादन: गर्भावस्था को सुरक्षित बनाए रखने के लिए प्लेसेंटा कई जरूरी हार्मोन्स बनाता है, जैसे— hCG, प्रोपेस्टेरोन (Progesterone), और एस्ट्रोजन (Estrogen)।
संक्रमण से सुरक्षा: यह एक फिल्टर की तरह काम करता है, जो कई तरह के हानिकारक बैक्टीरिया और इन्फेक्शन को बच्चे तक पहुंचने से रोकता है।
प्लेसेंटा की स्थिति और प्रकार (Positions of Placenta)
अल्ट्रासाउंड (Ultrasound) रिपोर्ट में प्लेसेंटा की पोजीशन लिखी होती है। गर्भाशय की दीवार पर यह कहाँ जुड़ा है, इसके आधार पर इसके कई प्रकार होते हैं:
Anterior Placenta (अंटीरियर प्लेसेंटा): जब प्लेसेंटा गर्भाशय के सामने वाले हिस्से (पेट की तरफ) जुड़ा हो।
Posterior Placenta (पोस्टीरियर प्लेसेंटा): जब प्लेसेंटा गर्भाशय के पीछे वाले हिस्से (रीढ़ की हड्डी की तरफ) जुड़ा हो।
Fundal Placenta (फंडल प्लेसेंटा): जब प्लेसेंटा गर्भाशय के सबसे ऊपरी हिस्से में स्थित हो।
Lateral Placenta (लेटरल प्लेसेंटा): जब प्लेसेंटा गर्भाशय के दाईं या बाईं दीवार पर हो।
Low-Lying Placenta (लो-लाइंग प्लेसेंटा): जब प्लेसेंटा गर्भाशय के निचले हिस्से में, यानी बच्चेदानी के मुंह (Cervix) के पास होता है।
प्लेसेंटा से जुड़ी जटिलताएं (Placenta Complications)
कुछ मामलों में प्लेसेंटा की स्थिति या कार्यप्रणाली में समस्या आ सकती है, जिसके लिए विशेष डॉक्टरी देखरेख की आवश्यकता होती है:
Placenta Previa (प्लेसेंटा प्रीविया): जब लो-लाइंग प्लेसेंटा गर्भाशय के मुंह (Cervix) को पूरी तरह या आंशिक रूप से ढक लेता है। इस स्थिति में नॉर्मल डिलीवरी में दिक्कत आ सकती है और ब्लीडिंग का खतरा रहता है।
Placental Abruption (प्लेसेंटल एब्रप्शन): डिलीवरी से पहले ही प्लेसेंटा का गर्भाशय की दीवार से अलग हो जाना। यह एक मेडिकल इमरजेंसी है।
Placenta Accreta (प्लेसेंटा एक्रेटा): इस स्थिति में प्लेसेंटा गर्भाशय की मांसपेशियों में बहुत गहराई तक जुड़ जाता है, जिससे डिलीवरी के समय इसे अलग करना मुश्किल हो जाता है।
स्वस्थ प्लेसेंटा के लिए क्या करें?
एक स्वस्थ शिशु के लिए प्लेसेंटा का स्वस्थ होना बेहद जरूरी है। इसके लिए गर्भवती महिलाओं को इन बातों का ध्यान रखना चाहिए:
संतुलित आहार लें: प्रोटीन, आयरन और फोलिक एसिड से भरपूर भोजन करें।
हाइड्रेटेड रहें: दिनभर में पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं।
धूम्रपान और शराब से दूर रहें: तंबाकू या अल्कोहल का सेवन प्लेसेंटा को भारी नुकसान पहुंचा सकता है।
नियमित जांच: डॉक्टर की सलाह पर समय-समय पर अल्ट्रासाउंड और एंटीनेटल चेकअप (Antenatal Check-ups) करवाते रहें।
ब्लड प्रेशर कंट्रोल रखें: हाई बीपी का सीधा असर प्लेसेंटा में होने वाले ब्लड फ्लो पर पड़ता है।
निष्कर्ष
Placenta (अपरा) गर्भावस्था का वह अदृश्य नायक है जो नौ महीनों तक निस्वार्थ भाव से शिशु को जीवन देता है। शिशु के जन्म के बाद (प्रसव के तीसरे चरण में) यह शरीर से बाहर आ जाता है। यदि आपकी अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट में प्लेसेंटा को लेकर कोई बात लिखी है, तो घबराने के बजाय अपने डॉक्टर (Gynecologist) से खुलकर बात करें।
FAQs
Q1. क्या प्लेसेंटा की पोजीशन बदलने से बच्चे के जेंडर (लिंग) का पता चल सकता है?
Ans: नहीं, यह पूरी तरह से एक मिथक (Myth) है। प्लेसेंटा की पोजीशन (Anterior या Posterior) का बच्चे के लड़का या लड़की होने से कोई संबंध नहीं होता।
Q2. प्लेसेंटा कब बाहर आता है?
Ans: शिशु के जन्म के ठीक बाद (लगभग 5 से 30 मिनट के भीतर) गर्भाशय के संकुचन के कारण प्लेसेंटा भी बाहर आ जाता है। इसे ‘आफ्टरबर्थ’ (Afterbirth) कहा जाता है।
Q3. क्या लो-लाइंग प्लेसेंटा (Low-Lying Placenta) बाद में ठीक हो सकता है?
Ans: हाँ, शुरुआती हफ्तों में यदि प्लेसेंटा नीचे है, तो जैसे-जैसे गर्भाशय का आकार बढ़ता है, प्लेसेंटा अक्सर ऊपर की ओर खिसक जाता है।
Also Read : Can a Pregnant Woman Eat Jackfruit? Myths & Facts
